एक वकील अपनी शादी का कार्ड लेकर बैंक पंहुचा, तब मैनेजर ने नियमानुसार उसे 2.5 लाख उसके खाते से निकाल दिए.. सात दिन बाद वही व्यक्ति फिर शादी का कार्ड लेकर पंहुचा तो मैनेजर ने पूछा अरे "वकील साहब अब किसकी किसकी शादी है?" वकील बोला--अबे किसकी क्या मेरी शादी ही है ! हैरत से मैनेजर बोला "वो हफ्ते भर पहले किसकी शादी थी?" वकील बोला -"वो मेरी ही शादी ही थी" मैनेजर बोला -ऐसे कैसे.....? वकील बोला--"बावले पहली शादी से तलाक़ हो गया,ले तलाक़ के पेपर। मैनेजर आश्चर्य से बोला- लेकिन इस बार भी लड़की उसी नाम की है, वकील बोला--अबे..उसी नाम की नहीं,वही है,उसी को तलाक़ देकर उसी से शादी कर रहा हूँ" क्यों तुझे कोई दिक्कत है ?" वकील को पैसे देने के बाद मेनेजर ICU में है.....
जब तक आर्थिक हालात सुधर नही जाते।इस बीच किसी को भी पैसो की तंगी महसुस हो। तो घबराये नहीं। आत्महत्या जैसे कदम ना उठाये। :grinning::grinning::grinning:सीधे अपने अपने ग्रुप के एडमिन के घर पहुच जाये। आपके और आपके परिवार को 30 Dec.तक खान पान की सुविधा मुफ़्त में दी जायेगी। एडमिन कभी भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होते। एडमिन सबको ले कर चलने का नाम है। :grinning::grinning::grinning:इतने बड़ी उपाधि और ओहदा कुछ तो काम आना ही चाहिए:footprints::footprints::grinning:सभी शांति बनाये रखे घबराये नहीं:grinning::grinning:बोलो एडमिन की जय
मै और मेरी पत्नी आज ये बातें करते थे तुम बेंक की लाईन मे आगे खडे रहेना मै भी लाईन मे तुम्हारे साथ रहुंगा लाईन तो बडी लंबी होगी प्यास लगी तो तुम मुझे पानी पीलाना भूख लगी तो मै तम्हे वडापाँव खिलाऊंगा मै और मेरी पत्नी आज ये बातें करते थे
(The Moment They Reached To Bank... There Was A Long Queue....)
ये कहां.... आ गये हम.... युंही साथ साथ चलते कड़ी धूप मे है जानम मेरे जिस्म -ओ-जाँ पीघलते
मजबूर ये हालात इधर भी है उधर भी लम्बी लम्बी ये लाइन इधर भी है उधर भी कहेने को बहुत कुछ है मगर किससे कहे हम कब तक युं ही खामोश रहे और सहे हम दिल कहेता है बेन्क की हरेक लाइन को तोड दे दिवार जो है ढाई हजार निकासी की वो गीरा दे सीधे चले जाए कॅशीयर के पास और कहे हाँ हमे कॅश चाहिए, हमको कॅश दे दे, कॅश दे दे, कॅश दे दे हर दिल मे यही बात इधर भी है उधर भी...