"सोने में जब जड़ कर हीरा, आभूषण बन जाता है, वह आभूषण फिर सोने का नही, हीरे का कहलाता है। काया इंसान ही सोना है और, कर्म हीरा कहलाता है, कर्मो के निखार से ही, मूल्य सोने का बढ़ जाता है।
किसी की "सलाह" से रास्ते जरूर मिलते हैं, पर मंजिल तो खुद की "मेहनत" से ही मिलती है ! "प्रशंसक" हमें बेशक पहचानते होंगे.. मगर "शुभचिन्तकों" की पहचान खुद को करनी पड़ती है
अच्छा वक़्त उसी का होता हैं... जो किसी का बुरा नहीं सोचते हैं...
श्री कृष्ण जी कहते *मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता हिम्मत वालो का इरादा कभी अधुरा नहीं होता जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता ...
कि आसान रास्तों पर चलने का शौक नहीं, मुझे चुनौतियों से लड़ना बखूभी आता है। ये आंधी तूफान विपदा दुख: दर्द क्या बिगाड़ेगे मेरा, इनसे तो मेरा वर्षों वर्षों का नाता हैं।