रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है। लेकिन एक अच्छे जूते के अन्दर एक भी कंकड़ हो तो एक अच्छी सड़क पर कुछ कदम चलना भी मुश्किल है। अर्थात् हम बाहर की चुनोतियों से नहीं बल्कि अन्दर की कमजोरियों से हार जाते है !
*अच्छा वक़्त उसी का होता हैं...* *जो किसी का बुरा नहीं सोचते हैं...*
*श्री कृष्ण जी कहते *मत सोच की तेरा* *सपना क्यों पूरा नहीं होता* *हिम्मत वालो का इरादा* *कभी अधुरा नहीं होता* *जिस इंसान के कर्म* *अच्छे होते है* *उस के जीवन में कभी* *अँधेरा नहीं होता* ..
मेरा तो एक ही छोटा सा सूत्र है, छोटा सा संदेश है: भीतर डुबकी मारो। जितने गहरे जा सको, जाओ - अपने में। वही पाओगे जो पाने योग्य है। और उसे पाकर निशिचत ही बांट सकोगे। पृथ्वी तुम्हारे हंसी के फूलों से भर सकती है।।।