एक छोटा किराना वाला,दूध वालाऔर सब्जी वाला आज भी तुमको उधार देने को तैयार है। आज देश में पैसा नहीं चल रहा पर एक भरोसे का व्यवहार चल रहा है ।ये भरोसे का व्यवहार उन छोटे दुकानदारों पे हमेशा रखना क्यों की हम ही एक दूसरे के पूरक है ये मोल या ऑनलाइन वाले नहीं
किसी की "सलाह" से रास्ते जरूर मिलते हैं, पर मंजिल तो खुद की "मेहनत" से ही मिलती है ! "प्रशंसक" हमें बेशक पहचानते होंगे.. मगर "शुभचिन्तकों" की पहचान खुद को करनी पड़ती है