*कमी हो तो अच्छे आचरण से* *पूरी की जा सकती है ।* *पर अच्छे आचरण की कमी हो* *तो वह सुंदरता से पूरी नही* *की जा सकती ।।* *याद रहे, जिस वक्त हम किसी* *का अपमान कर रहे होते है* *उस वक्त हम अपना* *सम्मान खो रहे होते है...,*
सुकून उतना ही देना, प्रभु जितने से जिंदगी चल जाए, औकात बस इतनी देना, कि, औरों का भला हो जाए, रिश्तो में गहराई इतनी हो, कि, प्यार से निभ जाए, आँखों में शर्म इतनी देना, कि, बुजुर्गों का मान रख पायें, साँसे पिंजर में इतनी हों, कि, बस नेक काम कर जाएँ, बाकी उम्र ले लेना, कि, औरों पर बोझ न बन जाएँ
मेरा तो एक ही छोटा सा सूत्र है, छोटा सा संदेश है: भीतर डुबकी मारो। जितने गहरे जा सको, जाओ - अपने में। वही पाओगे जो पाने योग्य है। और उसे पाकर निशिचत ही बांट सकोगे। पृथ्वी तुम्हारे हंसी के फूलों से भर सकती है।।।