कि आसान रास्तों पर चलने का शौक नहीं, मुझे चुनौतियों से लड़ना बखूभी आता है। ये आंधी तूफान विपदा दुख: दर्द क्या बिगाड़ेगे मेरा, इनसे तो मेरा वर्षों वर्षों का नाता हैं।
जीवन में सुख हो या दुख, सम्मान या अपमान, अंधेरा या उजाला, भीतर के तराजू को साधते चला जाए कोई, तो एक दिन उस परम संतुलन पर आ जाता है, जहां जीवन तो नहीं होता, अस्तित्व होता है; जहां लहर नहीं होती, सागर होता है; जहां 'मैं' नहीं होता, 'सब' होता है। " ~ ~ ओशो ...