पीपल के पत्तों जैसा मत बनिए, जो वक़्त आने पर सूख कर गिर जाते है। अगर बनना ही है, तो मेहंदी के पत्तों जैसा बनिए, जो सूखने के बाद भी, पीसने पर दूसरों की ज़िन्दगी में रंग भर देते हैं।
एक छोटा किराना वाला,दूध वालाऔर सब्जी वाला आज भी तुमको उधार देने को तैयार है। आज देश में पैसा नहीं चल रहा पर एक भरोसे का व्यवहार चल रहा है ।ये भरोसे का व्यवहार उन छोटे दुकानदारों पे हमेशा रखना क्यों की हम ही एक दूसरे के पूरक है ये मोल या ऑनलाइन वाले नहीं
"विचार ऐसे रखो कि तुम्हारे विचारों पर भी किसी को विचार करना पड़े, समुंदर बन कर क्या फायदा, बनना है तो छोटा तालाब बनो, जहां पर शेर भी पानी पिए, तो गर्दन झुका के..!!"