ए “सुबह ” तुम जब भी आना, सब के लिए बस "खुशियाँ" लाना. हर चेहरे पर “हंसी ” सजाना, हर आँगन मैं “फूल ” खिलाना. जो “रोये ” हैं इन्हें हँसाना. जो “रूठे ” हैं इन्हें मनाना, जो “बिछड़े” हैं तुम इन्हें मिलाना. प्यारी “सुबह ” तुम जब भी आना, सब के लिए बस “खुशिया ”ही लाना.
अगर किसी देश को भ्रष्टाचार – मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो , मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं. पिता, माता और गुरु...!
"विचार ऐसे रखो कि तुम्हारे विचारों पर भी किसी को विचार करना पड़े, समुंदर बन कर क्या फायदा, बनना है तो छोटा तालाब बनो, जहां पर शेर भी पानी पिए, तो गर्दन झुका के..!!"