ए “सुबह ” तुम जब भी आना, सब के लिए बस "खुशियाँ" लाना. हर चेहरे पर “हंसी ” सजाना, हर आँगन मैं “फूल ” खिलाना. जो “रोये ” हैं इन्हें हँसाना. जो “रूठे ” हैं इन्हें मनाना, जो “बिछड़े” हैं तुम इन्हें मिलाना. प्यारी “सुबह ” तुम जब भी आना, सब के लिए बस “खुशिया ”ही लाना.
*कमी हो तो अच्छे आचरण से* *पूरी की जा सकती है ।* *पर अच्छे आचरण की कमी हो* *तो वह सुंदरता से पूरी नही* *की जा सकती ।।* *याद रहे, जिस वक्त हम किसी* *का अपमान कर रहे होते है* *उस वक्त हम अपना* *सम्मान खो रहे होते है...,*
नदी का पानी मीठा होता है क्योंकि वो पानी देती रहती है। सागर का पानी खारा होता है क्योंकि वो हमेशा लेता रहता है। नाले का पानी हमेशा दुर्गंध देता है क्योंकि वो रूका हुआ होता है।
यही जिंदगी है
देते रहोगे तो सबको मीठे लगोगे। लेते रहोगे तो खारे लगोगे। और अगर रुक गये तो सबको बेकार लगोगे।
"सोने में जब जड़ कर हीरा, आभूषण बन जाता है, वह आभूषण फिर सोने का नही, हीरे का कहलाता है। काया इंसान ही सोना है और, कर्म हीरा कहलाता है, कर्मो के निखार से ही, मूल्य सोने का बढ़ जाता है।