बिकता अगर प्यार तो कौन
नहीं खरीदता;
बिकती अगर खुशियां तो कौन उसे बेचता;
दर्द अगर बिकता तो हम आपसे खरीद लेते;
और आपकी खुशियों के लिए हम खुद को बेच
देते।
है धूंध से लिपटी हर राहें
खोये है, मंजिल का पता पायें कैसे?
बडी खामोश है बेबसी,
नि:शब्द है,शब्दों का पता पायें कैसे?
हर रात तेरी यादों का कहर ढाती आयी,
कातिल है अंधेरा,सुबह का पता पायें कैसे?
उलझनें रिश्तों की कुछ ऐसी पायी,
खो चूके है,अब खूद का पता पायें कैसे?
रिश्ते बनाना इतना आसान होता है
जैसे 'मिट्टी' से 'मिट्टी' पर 'मिट्टी' लिखना ॥
लेकिन...
रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल होता है
जैसे 'पानी' पर 'पानी' से 'पानी' लिखना ॥
इश्क़ वाले आँखों की बात समझ लेते हैं;
सपनों में मिल जाए तो मुलाक़ात समझ लेते हैं;
रोता तो आसमान भी है अपने बिछड़े प्यार के लिए;
फिर पता नहीं लोग क्यों उसे बरसात समझ लेते है।
क्या फ़र्क है दोस्ती और मोहब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही हैं लेकिन फ़र्क तो है;
बरसों बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहब्बत नज़र चुरा लेती है।
Jaroori Nahi Jise Ham Chaahte
He Wo Hamara Ho Jaroori Nahi
Hai Jeene Ke Liye Koi Sahaara
Ho Kuch Kashtiyan Khud Wa
Khuddoob Jaatin Hen Jaroori Nahi
Har Kashti Ka Koi Kinaara Ho.
bindass chhotan chandra