सुबह रो-रो के...
सुबह रो-रो के शाम होती है;...
शब तड़प कर तमाम होती है;
सामने चश्म-ए-मस्त साक़ी के;
किस को परवाह-ए-जाम होती है;
कोई ग़ुंचा खिला के बुल-बुल को;
बेकली ज़र-ए-दाम होती है;
हम जो कहते हैं कुछ इशारों से;
ये ख़ता ला-कलाम होती है।
जब हो तुझे मेरी जरुरत
मैं हाज़िर हो जाऊ
जीवन में हो जब बुरा वक़्त
मैं साथ निभाऊ
ख़ुशी मिले तुम्हे जब इस जहाँ में
मैं पीछे खड़ा हो मुस्कुराऊ
जीवन में हर वक़्त तेरी परछाई बन
मैं तेरे साथ चलता जाऊ.
कुछ रिश्ते इस जहाँ में खास होते हैं;
हवा के रूख से जिनके एहसास होते हैं;
यह दिल की कशिश नहीं तो और क्या है;
दूर रहकर भी वो दिल के कितने पास होते हैं।..
Hum Hamesha Se Hi Yehi Khade Hai "galib"
Tumhe Jawab Dene Ke liya
Bas Faraq Itna Hai Ke
Tumhe Parakh Nahi Hai Apnao Ki
Aur Hum Gair Ko B Salam Kya Karte Hai
चुप भी रहो सनम , लब से न इश्क की कुछ बात करो
अंखियों में अंखिया डाल, नैनो से प्यार का इज़हार करो
हमको तो तुम्हारी खुबसूरत अदाओं ने ही मार डाला है
अभी तो मोहब्बत की शुरुवात है कुछ तो इंतज़ार करो
जर्जर हौसला मरम्मत मांगता है;
मुश्किल वक्त हिम्मत मांगता है;
उम्र भर नेकी न
की गयी मगर;
अब बुढ़ापे में जन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
वफ़ा के सौदे में वो सितमगर मुझसे;
शर्त में बेशर्त मोहब्बत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
काफ़िर बेटों का वो खुदा-परस्त बाप;
औलादों के लिए मन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
एक रुपया नहीं निकलता उनकी जेब
से;
जिनके लिए माँ का दिल बरकत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
मैंने कोशिश के बाद उसे भुला दिया;
उसकी यादों को सीने से मिटा दिया;
एक दिन फिर उसका पैगाम आया;
लिखा था मुझे भूल जाओ और;
मुझे हर लम्हा फिर याद दिला दिया।
शायरी की कदर को सिर्फ आशिक समझता है,
धरती की प्यास को सिर्फ बादल समझता है,
उन की मोहब्बत को मेरा दिल समझता है,
मेरी मोहब्बत के एहसासो को मेरा रब समझता है…