उलझी हुई दुनीयां को पाने
की जिद्द करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की जिद्द करो,
इस समंदर में तुफान बहुत आते है तो क्या हुआ,
इसके साहिल पे घर बनाने की जिद्द करो...
khan
दिल मेरा जिस से बहलता...
दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला;
बुत के बने तो मिले अल्लाह का बंदा ना मिला;
बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस;
एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला;
गुल के ख़्वाहाँ तो नज़र आये बहुत इत्रफ़रोश;
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला;
वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शद ने;
कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला;
सय्यद उट्ठे जो गज़ट ले के तो लाखों लाये;
शैख़ क़ुरान दिखाता फिरा पैसा न मिला।
कितना सोचा था मैंने नए रिश्ते बना के भूल जाउंगी तुम्हे :point_right: लेकिन में ये भूल गई थी रिश्ते बदल सकते है, साँसे नहीं, जो की तुम हो :kissing_heart:
वो मेहँदी वाले हाथ मुझे दिखा के रोये;
अब मैं हूँ किसी और की हूँ मुझे ये
बता के रोये;
पहले कहते थे
कि नहीं जी सकते तेरे बिन;
आज फिर वही बात वो दोहरा के रोये;
कैसे कर लूं उनकी मोहब्बत पे शक यारों;
वो भरी महफ़िल में मुझे गले लगा के रोये।