Sirf Najdikiyo Se Mohabbat Hua Nahi Karti,
Fasle Jo Dilon Me Ho To Fir Chahat Hua Nhi Karti
Agar Naraz Ho Khafa Ho To Shikayat Karo Hamse
Khamosh Rahne Se Dilo Ki Duriya Mita Nhi Karti
हो गई है पीर पर्वत-सी...
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए;
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए;
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी;
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए;
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में;
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए;
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं;
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए;
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही;
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
Bekhudi ki zindagi hum jiya nahi karte,
Jaam dusro se chheenkar hum piya nhi karte
Unko mohabbat hai toh aakar izhaar karen,
Peecha hum bhi kisi ka kiya nahi karte..!!
मेरे दिल की ख्वाहिश है, तू मेरे पास ही रहे,
तेरी आँखों के काजल की, मुझे प्यास सी रहे,
सोनी तेरे दिल मैं, मेरी बात के जज्बात से रहे,
जैसे मेने तुझे चाहा, मुझे तू भी चाहती रहे….
यूनानी मिश्र और रोमी सब मिट गये जहाँ से;
अब तक मगर हैं बाकी नाम-ओ-निशा हमारा;
कुछ बात हैं के हसती मिटती नहीं हमारी;
सदियों रहा हैं दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा।
समंदर पीड का अंदर है लेकिनरो नहीं सकता,
ये आँसु प्यार का मोती हैइसको खो नहीं सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तु बनालेना मगर सुन ले...
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा.