तुम यहाँ धरती पर लकीरें
खींचते हो;
हम वहाँ अपने लिये नये आसमान ढूंढते हैं;
तुम बनाते जाते हो पिंजड़े पे पिंजड़ा;
हम अपने पंखों में नयी उड़ान ढूंढते हैं।
Meri uljhi duniya ko tu yu aabad na kar,
beete lamho ko tu firse yaad na kar,
ek ked parinde ka hai tumse bas yahi kehna,
me bhul chuka hu udaan mujhe firse aazad na kar..
हो गई है पीर पर्वत-सी...
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए;
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए;
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी;
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए;
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में;
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए;
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं;
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए;
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही;
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
कल रात भी बारिश खूब हुई
और बादल टूट के बरसा था
नदिया कुचे सब जल थल थे
पर सोच का सेहरा प्यासा था
बंद दरवाजे के कुंचो पर
जब बूंदों ने दस्तक दी
एहसास हुआ तुम आये हो
कुछ अंदाज़ तुम्हारे जैसा था
किसी के दिल पे क्या गुजरी हे वो अनजान क्या जाने,
प्यार किसको कहते हे वो नादान क्या जाने,
हवा के साथ उठा ले गया घर का परिंदा,
केसे बना था ये घोसला वो तूफान क्या जाने.
प्रेम
तन्हाईयों में मुस्कुराना इश्क है;
एक बात को सबसे छुपाना इश्क है;
यु तो नींद नहीं आती हमें रात भर;
मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागतेसोना इश्क है!
दर्द जब हद से गुजर जाता हूँ तो रो लेता हूँ;
जब किसी से कुछ कह
नहीं पता तो रो लेता हूँ;
यूँ तो मेला हैं चारों तरफ हमारे, लोगों का मगर;
जब कोई अपना नजर नहीं आता तो रो लेता हूँ।