तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी
क़ैद माँगी थी रिहाई तो नहींमाँगी थी !!
मैने क्या जुर्म किया आप ख़फ़ा हो बैठे
प्यार माँगा था ख़ुदाई तो नहीं माँगी थी !!
मेरा हक़ था तेरी आँखों की छलकती मय पर
चीज अपनी थी पराई तो नहीं माँगी थी !!
चाहने वालों को कभी तूने सितम भी न दिया
तेरी महफ़िल में रुसवाई तो नहीं माँगी थी !!
दुशमनी की थी अगर वह भी निबाहता ज़ालिम
तेरी हसरत में भलाई तो नहींमाँगी थी !!
अपने दीवाने पे इतने भी सितम ठीक नही
तेरी उलफ़त में बुराई तो नहीं माँगी थी !
Tumhari pasand hamari chahat ban jaaye,
Tumhari muskrahat dil ki rahat ban jaaye,
Khuda khushiyo se itna khush kar de apko
Ki aapko khush dekhna hmari adat ban jaaye.
हवा बन कर...
हवा बन कर बिखरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
मेरे जीने या मरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उसे तो अपनी खुशियों से;
ज़रा भी फुर्सत नहीं मिलती;
मेरे ग़म के उभरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उस शख्स की यादों में;
मैं चाहे रोते रहूँ लेकिन;
मेरे ऐसा करने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
ना पूछो हाल मुझसे #धड़कनो की #रफ़्तार का
असर आज भी है आँखों में मेरे #दीदार का <3
लिख दिया है अपना #अफसाना लफ्ज़ो में तुझको
सुन लो मेरी #आवाज में एक #नगमा #प्यार का ..iii