अब तो अपनी तबियत भी कुछ जुदा सी लगती है;
सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा सी लगती है;
कभी राज़ी तो कभी मुझसे खफा सी लगती है;
ज़िंदगी तु ही बता कि तु मेरी क्या लगती है।
है धूंध से लिपटी हर राहें
खोये है, मंजिल का पता पायें कैसे?
बडी खामोश है बेबसी,
नि:शब्द है,शब्दों का पता पायें कैसे?
हर रात तेरी यादों का कहर ढाती आयी,
कातिल है अंधेरा,सुबह का पता पायें कैसे?
उलझनें रिश्तों की कुछ ऐसी पायी,
खो चूके है,अब खूद का पता पायें कैसे?
Meri uljhi duniya ko tu yu aabad na kar,
beete lamho ko tu firse yaad na kar,
ek ked parinde ka hai tumse bas yahi kehna,
me bhul chuka hu udaan mujhe firse aazad na kar..
जर्जर हौसला मरम्मत मांगता है;
मुश्किल वक्त हिम्मत मांगता है;
उम्र भर नेकी न
की गयी मगर;
अब बुढ़ापे में जन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
वफ़ा के सौदे में वो सितमगर मुझसे;
शर्त में बेशर्त मोहब्बत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
काफ़िर बेटों का वो खुदा-परस्त बाप;
औलादों के लिए मन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
एक रुपया नहीं निकलता उनकी जेब
से;
जिनके लिए माँ का दिल बरकत मांगता है;
मुश्किल वक्त...