ख्याल में वो...
ख्याल में वो, बेसुरती में वो;
आँखों में वो, अक्स में वो;
ख़ुशी में वो, दर्द में वो;
आब में वो, शराब में वो;
लाभ में वो, बेहिसाब में वो;
मेरे अब हो लो, या जान मेरी लो।
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रेगिस्तान भी :desert: हरे :deciduous_tree::herb::shamrock: हो जाते है, जब अपने :sunglasses: साथ :raising_hand::raised_hands: अपने भाई :two_men_holding_hands: खड़े हो जाते है ।।
समंदर पीड का अंदर है लेकिनरो नहीं सकता,
ये आँसु प्यार का मोती हैइसको खो नहीं सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तु बनालेना मगर सुन ले...
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा.
कितनी अजीब बात है ना जब तू मेरे पास थी तो,
हर दम ये सोचता था की क्या में तेरी कदर नहीं करता
और आज तू मेरे पास नहीं है तो है तो ये एहसास होता है की,
कदर तो हमेशा से थी मगर तुजे न खोने के यकीन ने अँधा कर दिया था.
चुप भी रहो सनम , लब से न इश्क की कुछ बात करो
अंखियों में अंखिया डाल, नैनो से प्यार का इज़हार करो
हमको तो तुम्हारी खुबसूरत अदाओं ने ही मार डाला है
अभी तो मोहब्बत की शुरुवात है कुछ तो इंतज़ार करो
किसी के दिल पे क्या गुजरी हे वो अनजान क्या जाने,
प्यार किसको कहते हे वो नादान क्या जाने,
हवा के साथ उठा ले गया घर का परिंदा,
केसे बना था ये घोसला वो तूफान क्या जाने.
Hum Hamesha Se Hi Yehi Khade Hai "galib"
Tumhe Jawab Dene Ke liya
Bas Faraq Itna Hai Ke
Tumhe Parakh Nahi Hai Apnao Ki
Aur Hum Gair Ko B Salam Kya Karte Hai