टूटे :broken_heart: जब #Dil :heart: तो #log :two_men_holding_hands: कहते है... #Tumhe उस :princess_tone1: से अच्छी अच्छी #ladki :bride_with_veil_tone1: मिलेगी... पर कोई ये #nahi :x: समझता #jarurat अच्छी :heart_eyes: की नहीं उस #ladki :bride_with_veil_tone1: की होती है... जिससे #Mohabbat :couple_with_heart: है...:heart:
दर्द जब हद से गुजर जाता हूँ तो रो लेता हूँ;
जब किसी से कुछ कह
नहीं पता तो रो लेता हूँ;
यूँ तो मेला हैं चारों तरफ हमारे, लोगों का मगर;
जब कोई अपना नजर नहीं आता तो रो लेता हूँ।
Sirf Najdikiyo Se Mohabbat Hua Nahi Karti,
Fasle Jo Dilon Me Ho To Fir Chahat Hua Nhi Karti
Agar Naraz Ho Khafa Ho To Shikayat Karo Hamse
Khamosh Rahne Se Dilo Ki Duriya Mita Nhi Karti
क्या फ़र्क है दोस्ती और मोहब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही हैं लेकिन फ़र्क तो है;
बरसों बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहब्बत नज़र चुरा लेती है।
भीड़ भाड़ को छोड़ आए हैं बस तन्हाई भाई है.
वहां बहुत बेचैनी भोगी यहां खुमारी छाई है.
वो सवाल अब यहां नहीं हैं जिनके उत्तर मुश्किल थे.
जितनी हमने इच्छा की थी उतनी राहत पाई है.
समंदर पीड का अंदर है लेकिनरो नहीं सकता,
ये आँसु प्यार का मोती हैइसको खो नहीं सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तु बनालेना मगर सुन ले...
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा.
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार...
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है;
न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है;
किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म;
गिला है जो भी किसी से तेरे सबब से है;
हुआ है जब से दिल-ए-नासुबूर बेक़ाबू;
कलाम तुझसे नज़र को बड़े अदब से है;
अगर शरर है तो भड़के, जो फूल है तो खिले;
तरह तरह की तलब तेरे रंगे-लब से है;
कहाँ गये शबे-फ़ुरक़त के जागनेवाले;
सितारा-ए-सहरी हमकलाम कब से है।
Jab koyi itna khaas ban jaaye,
Uske bare me hi sochna ehsaas ban jaye
To mang lena khuda se use zindagi k liye,
Isse pahle k wo kisi aur ki saans ban jaaye.
मेरी मेंहदी की महक तेरे तन से मिलेगी,
जद्दोज़हद में उतरी एक पायल तेरे दामन से लिपटी मिलेगी...
सुबह की हया के साथ खुलेगी जब पलके मेरी,
रात की सरगोशियाँ तेरी नजरो में मिलेगी
दोनों जहाँ देके वो...
दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा;
यां आ पड़ी ये शर्म की तकरार क्या करें;
थक-थक के हर मक़ाम पे दो चार रह गये;
तेरा पता न पायें तो नाचार क्या करें;
क्या शमा के नहीं है हवाख़्वाह अहल-ए-बज़्म;
हो ग़म ही जांगुदाज़ तो ग़मख़्वार क्या करें।
Translation:
नाचार=जिनका बस ना चले,
हवाख़्वाह=शुभचिंतक,
अहल-ए-बज़्म=महफिल वाले,
जांगुदा=जान घुलाने वाला।