बहुत महंगे किराए के मकाँ से;
चलो आओ चलें अब इस जहां से;
यूँ ही तुम थामे रहना हाथ मेरा;
हमे जाना है आगे आसमां से;
ये तुम ही हो मेरे हमराह वरना;
मेरे पैरों में दम आया कहाँ से;
मेरी आँखों से क्या ज़ाहिर नहीं था;
मैं तेरा नाम क्या लेता जुबां से।
कुछ खूबसूरत से पल किस्सा बन जाते है;
जाने कब जिंदगी का हिस्सा बन जाता है;
कुछ लोग अपने होकर भी अपने
नहीं होते;
और कुछ बेगाने होकर
भी जिंदगी का हिस्सा बन जाते है।
हवा का ज़ोर
भी काफ़ी बहाना होता है;
अगर चिराग किसी को जलाना होता है;
ज़ुबानी दाग़ बहुत लोग करते रहते हैं;
जुनूँ के काम को कर के दिखाना होता है;
हमारे शहर में ये कौन अजनबी आया;
कि रोज़ सफ़र पे रवाना होता है;
कि तू भी याद नहीं आता ये
तो होना था;
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है।
हम तो मौजूद थे रात में उजालों की तरह;
लोग निकले ही नहीं ढूंढने वालों की तरह;
दिल तो क्या हम रूह में भी उतर जाते;
उस ने चाहा ही नहीं चाहने वालों की तरह।
Bekhudi ki zindagi hum jiya nahi karte,
Jaam dusro se chheenkar hum piya nhi karte
Unko mohabbat hai toh aakar izhaar karen,
Peecha hum bhi kisi ka kiya nahi karte..!!
जर्जर हौसला मरम्मत मांगता है;
मुश्किल वक्त हिम्मत मांगता है;
उम्र भर नेकी न
की गयी मगर;
अब बुढ़ापे में जन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
वफ़ा के सौदे में वो सितमगर मुझसे;
शर्त में बेशर्त मोहब्बत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
काफ़िर बेटों का वो खुदा-परस्त बाप;
औलादों के लिए मन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
एक रुपया नहीं निकलता उनकी जेब
से;
जिनके लिए माँ का दिल बरकत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
✵➥ बेवफा तेरा :bride_with_veil: मासुम ☜ चेहरा भुल जाने के ➣ काबिल :negative_squared_cross_mark: नहीं ••
तु :bride_with_veil: बहुत ➪ खुबसूरत :ok_hand_tone1:है लेकिन दिल :heart_decoration: लगाने के काबिल नहीं..||•||:ribbon::two_women_holding_hands::flags:||•||
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार...
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है;
न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है;
किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म;
गिला है जो भी किसी से तेरे सबब से है;
हुआ है जब से दिल-ए-नासुबूर बेक़ाबू;
कलाम तुझसे नज़र को बड़े अदब से है;
अगर शरर है तो भड़के, जो फूल है तो खिले;
तरह तरह की तलब तेरे रंगे-लब से है;
कहाँ गये शबे-फ़ुरक़त के जागनेवाले;
सितारा-ए-सहरी हमकलाम कब से है।