या मुझे अफ़्सर-ए-शाहा...
या मुझे अफ़्सर-ए-शाहा न बनाया होता;
या मेरा ताज गदाया न बनाया होता;
ख़ाकसारी के लिये गरचे बनाया था मुझे;
काश ख़ाक-ए-दर-ए-जानाँ न बनाया होता;
नशा-ए-इश्क़ का गर ज़र्फ़ दिया था मुझको;
उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता;
अपना दीवाना बनाया मुझे होता तूने;
क्यों ख़िरदमन्द बनाया न बनाया होता;
शोला-ए-हुस्न चमन में न दिखाया उसने;
वरना बुलबुल को भी परवाना बनाया होता।
मैंने कोशिश के बाद उसे भुला दिया;
उसकी यादों को सीने से मिटा दिया;
एक दिन फिर उसका पैगाम आया;
लिखा था मुझे भूल जाओ और;
मुझे हर लम्हा फिर याद दिला दिया।
कुछ खूबसूरत से पल किस्सा बन जाते है;
जाने कब जिंदगी का हिस्सा बन जाता है;
कुछ लोग अपने होकर भी अपने
नहीं होते;
और कुछ बेगाने होकर
भी जिंदगी का हिस्सा बन जाते है।
यही हुआ कि हवा ले गई उड़ा केमुझे
तुझे तो कुछ न मिला ख़ाक मेंमिला के मुझे
बस एक गूँज है जो साथ-साथचलती है
कहाँ ये छोड़ गए फ़ासले सदा केमुझे
हो इक अदा तो उसे नाम दूँतमन्ना का
हज़ार रंग हैं इस शोला-ए-हिनाके मुझे
बलन्द शाख़ से उलझा था चाँदपिछले पहर
गुज़र गया है कोई ख़्वाब-सादिखा के मुझे
मैं अपनी मौज में डूबा हुआजज़ीरा हूँ
उतर गया है समन्दर बलन्द पाके मुझे
मेरी गली से वो जब भी गुज़रता होगा;
मोड़ पे जा के कुछ देर ठहरता होगा;
भूल जाना मुझको इतना आसान तो न होगा;
दिल में कुछ तो टूट के उसके भी बिखरता होगा।
Sawal kuch bhi ho, jawab tum hi ho
Rasta koi bhi ho, manzil tum hi ho
Dukh kitna hi ho, khushi tum hi ho
Arman kitne bhi ho, aarzoo tum hi ho
Gussa kitna bhi ho, pyar tum hi ho,
Khawab koi bhi ho, us me tum hi ho
Kyunki tum hi ho…!! Ab tum hi ho,
Meri ashiqi ab tum hi ho….!!!!!
Hum Hamesha Se Hi Yehi Khade Hai "galib"
Tumhe Jawab Dene Ke liya
Bas Faraq Itna Hai Ke
Tumhe Parakh Nahi Hai Apnao Ki
Aur Hum Gair Ko B Salam Kya Karte Hai