हवा बन कर...
हवा बन कर बिखरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
मेरे जीने या मरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उसे तो अपनी खुशियों से;
ज़रा भी फुर्सत नहीं मिलती;
मेरे ग़म के उभरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उस शख्स की यादों में;
मैं चाहे रोते रहूँ लेकिन;
मेरे ऐसा करने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
हर तरफ हर जगह...
हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी;
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी;
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ;
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी;
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ;
हर नए दिन नया इतज़ार आदमी;
हर तरफ भागते दौड़ते का शिकार आदमी;
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी;
ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र;
आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी।
कुछ रिश्ते इस जहाँ में खास होते हैं;
हवा के रूख से जिनके एहसास होते हैं;
यह दिल की कशिश नहीं तो और क्या है;
दूर रहकर भी वो दिल के कितने पास होते हैं।..
कभी नजरे मिलाने में...
कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है;
कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है;
किसी ने आँखे भी ना खोली तो सोने की नगरी में;
किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है;
कभी काली सियाह राते हमें एक पल की लगती है;
कभी एक पल बिताने में ज़माने बीत जाते है;
कभी खोला दरवाजा सामने खड़ी थी मंजिल;
कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है;
एक पल में टूट जाते है, उम्र भर के वो रिश्ते;
जिन्हें बनाने में जमाने बीत जाते है।
ख्याल में वो...
ख्याल में वो, बेसुरती में वो;
आँखों में वो, अक्स में वो;
ख़ुशी में वो, दर्द में वो;
आब में वो, शराब में वो;
लाभ में वो, बेहिसाब में वो;
मेरे अब हो लो, या जान मेरी लो।
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Woh Kya Jane Pyar Ki Keemat Kya Hoti Hai,
Jab Nhi Milta Pyar To Aankhe Kitna Roti Hain,
Kbhi Na Kbhi To Wo Bhi Kisi Se Dil Lagayegi,
Karegi Vo Bewafai To Meri Wafa Ki Yaad Ayegi.
यही हुआ कि हवा ले गई उड़ा केमुझे
तुझे तो कुछ न मिला ख़ाक मेंमिला के मुझे
बस एक गूँज है जो साथ-साथचलती है
कहाँ ये छोड़ गए फ़ासले सदा केमुझे
हो इक अदा तो उसे नाम दूँतमन्ना का
हज़ार रंग हैं इस शोला-ए-हिनाके मुझे
बलन्द शाख़ से उलझा था चाँदपिछले पहर
गुज़र गया है कोई ख़्वाब-सादिखा के मुझे
मैं अपनी मौज में डूबा हुआजज़ीरा हूँ
उतर गया है समन्दर बलन्द पाके मुझे