मेरी आँखों में...
मेरी आँखों में आँसू आए ना होते;
अगर वो हमें देखकर मुस्कुराए ना होते;
सोचता हूँ अक्सर तन्हाई में मैं;
मेरी ज़िंदगी में काश वो आए ना होते;
ना तड़पते हम उनके लिए इतना;
दिल ने ख़्वाब अगर उनके सजाए ना होते;
ना टूट कर बिखरता मैं इस कदर;
अगर वो मेरे दिल में अपना घर बसाए ना होते।
भीड़ भाड़ को छोड़ आए हैं बस तन्हाई भाई है.
वहां बहुत बेचैनी भोगी यहां खुमारी छाई है.
वो सवाल अब यहां नहीं हैं जिनके उत्तर मुश्किल थे.
जितनी हमने इच्छा की थी उतनी राहत पाई है.
हर तरफ हर जगह...
हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी;
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी;
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ;
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी;
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ;
हर नए दिन नया इतज़ार आदमी;
हर तरफ भागते दौड़ते का शिकार आदमी;
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी;
ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र;
आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी।
ख्याल में वो...
ख्याल में वो, बेसुरती में वो;
आँखों में वो, अक्स में वो;
ख़ुशी में वो, दर्द में वो;
आब में वो, शराब में वो;
लाभ में वो, बेहिसाब में वो;
मेरे अब हो लो, या जान मेरी लो।
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