कभी नजरे मिलाने में...
कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है;
कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है;
किसी ने आँखे भी ना खोली तो सोने की नगरी में;
किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है;
कभी काली सियाह राते हमें एक पल की लगती है;
कभी एक पल बिताने में ज़माने बीत जाते है;
कभी खोला दरवाजा सामने खड़ी थी मंजिल;
कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है;
एक पल में टूट जाते है, उम्र भर के वो रिश्ते;
जिन्हें बनाने में जमाने बीत जाते है।
ख्याल में वो...
ख्याल में वो, बेसुरती में वो;
आँखों में वो, अक्स में वो;
ख़ुशी में वो, दर्द में वो;
आब में वो, शराब में वो;
लाभ में वो, बेहिसाब में वो;
मेरे अब हो लो, या जान मेरी लो।
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क्यूँ तबीअत कहीं...
क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं;
दोस्ती तो उदास करती नहीं;
हम हमेशा के सैर-चश्म सही;
तुझ को देखें तो आँख भरती नहीं;
शब-ए-हिज्राँ भी रोज़-ए-बद की तरह;
कट तो जाती है पर गुज़रती नहीं;
ये मोहब्बत है, सुन, ज़माने, सुन;
इतनी आसानियों से मरती नहीं;
जिस तरह तुम गुजारते हो फ़राज़;
जिंदगी उस तरह गुज़रती नहीं।
Zindagi ye rang dikhati hai kitne,
Gair ho jate hain, ek pal mein apne.
Sapno ki duniya mein kabhi na jana yaar,
Dil toot jata hai, jab toot te hain sapne
pyar unse karo jo use nibhana janta ho, dil usko do jo use sambhalna janta ho, khwab unse rakho jo use apna mane, khwab unse mat rakho jo sirf todna janta ho.
जज़्बात बहकते है जब तुमसे मिलती हूँ
अरमान मचलते है जब तुमसे मिलती हूँ...
साथ हम दोनों का कोई बर्दाश्त नहीं करता
सब हमसे जलते हैं जब तुमसे मिलती हूँ...
आँखों से तुम जाने क्या क्या कह देते हो
तूफ़ान से चलते हैं जब तुमसे मिलती हूँ...
हाथो से हट मिलते हैं होंठो से होंठ
दिल से दिल मिलते हैं जब तुमसे मिलती हूँ...
आहो में बह जाती है तन्हाई कि हर रात
कई शिकवे दिल में रहते हैं जब तुमसे मिलती हूँ..
Posted my swee2
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र
के हम है;
रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम है;
पहले हर चीज़
थी अपनी मगर अब लगता है;
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के
हम है;
वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से;
किसको मालूम कहाँ के हैं, किधर के हम हैं;
चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब;
सोचते रहते हैं किस राहग़ुज़र के हम है।