सुबह रो-रो के...
सुबह रो-रो के शाम होती है;...
शब तड़प कर तमाम होती है;
सामने चश्म-ए-मस्त साक़ी के;
किस को परवाह-ए-जाम होती है;
कोई ग़ुंचा खिला के बुल-बुल को;
बेकली ज़र-ए-दाम होती है;
हम जो कहते हैं कुछ इशारों से;
ये ख़ता ला-कलाम होती है।
नया दर्द एक और दिल में जगा कर चला गया;
कल फिर वो मेरे शहर में आकर चला गया;
जिसे ढूंढ़ता रहा मैं लोगों की भीड़ में;
मुझसे वो अपने आप को छुपा कर चला गया।
Everybody says ‘I ‘
Is the best sentence in whole world..
But..
I believe that ..
‘I Love you too’ is the Best…
Because Many Gets To hear the first
one But only few gets to hear the second one…!!
तुझे पाने की इसलिए जिद्द नहीं करता,
कि तुझे खोने को दिल नहीं करता,
तु मिलता है तो इसलिए नजरें नहीं उठाते,
कि फिर नजरें हटाने को दिल नहीं करता,
दिल की बात इसलिए तुझ से नहीं करता,
कि तेरा दिल दुखाने को दिल नहीं करता,
ख्वाबो में इसलिए तुझको नहीं सजाते,
कि फिर निंद से जागने को दिल नहीं करता।
ए रात सोने दे...
ए रात सोने दे यूं तंग ना किया कर;
बेकार सवालों में पाबंद ना किया कर;
इस के सिवा और भी ज़माने के काम हैं;
तु मेरे ख्यालात बे-ढंग ना किया कर;
दुनियाँ में और लोग भी बस्ते हैं तन्हा;
तु सिर्फ मेरे साथ ही जंग न किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग ना किया कर;
मज़बूत हूँ, पर इतना भी नहीं हूँ;
दुनिया के सभी ग़म मेरे संग ना किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग न किया कर।
यार था गुलज़ार था...
यार था गुलज़ार था बाद-ए-सबा थी मैं न था;
लायक़-ए-पा-बोस-ए-जाँ क्या हिना थी, मैं न था;
हाथ क्यों बाँधे मेरे छल्ला अगर चोरी हुआ;
ये सरापा शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना थी, मैं न था;
मैंने पूछा क्या हुआ वो आप का हुस्न्-ओ-शबाब;
हँस के बोला वो सनम शान-ए-ख़ुदा थी, मैं न था;
मैं सिसकता रह गया और मर गये फ़रहाद-ओ-क़ैस;
क्या उन्हीं दोनों के हिस्से में क़ज़ा थी, मैं न था।
इश्क़ वाले आँखों की बात समझ लेते हैं;
सपनों में मिल जाए तो मुलाक़ात समझ लेते हैं;
रोता तो आसमान भी है अपने बिछड़े प्यार के लिए;
फिर पता नहीं लोग क्यों उसे बरसात समझ लेते है।
जब तुम्हारा जादू चलेगा
सब तरफ होगी बहार
हर कोई होगा बेक़रार
तुम्हारा इंतज़ार ……………
ना कहीं होगा वैर
ना कहीं होगी घृणा
बस प्यार ही प्यार
तुम्हारा इंतज़ार ……………
हम रोज़ प्रेम दिवस मनाएँग