कुछ रिश्ते इस जहाँ में खास होते हैं;
हवा के रूख से जिनके एहसास होते हैं;
यह दिल की कशिश नहीं तो और क्या है;
दूर रहकर भी वो दिल के कितने पास होते हैं।..
शायरी की कदर को सिर्फ आशिक समझता है,
धरती की प्यास को सिर्फ बादल समझता है,
उन की मोहब्बत को मेरा दिल समझता है,
मेरी मोहब्बत के एहसासो को मेरा रब समझता है…
तु ही मिल जाए मुझे बस इतना ही काफी है;
मेरी हर सांस ने बस ये ही दुआ मांगी है;
जाने क्यूँ दिल खिंचा चला जाता है तेरी तरफ;
क्या तूने भी मुझे पाने की दुआ मांगी है।
तुझे पाने की इसलिए जिद्द नहीं करता,
कि तुझे खोने को दिल नहीं करता,
तु मिलता है तो इसलिए नजरें नहीं उठाते,
कि फिर नजरें हटाने को दिल नहीं करता,
दिल की बात इसलिए तुझ से नहीं करता,
कि तेरा दिल दुखाने को दिल नहीं करता,
ख्वाबो में इसलिए तुझको नहीं सजाते,
कि फिर निंद से जागने को दिल नहीं करता।
या मुझे अफ़्सर-ए-शाहा...
या मुझे अफ़्सर-ए-शाहा न बनाया होता;
या मेरा ताज गदाया न बनाया होता;
ख़ाकसारी के लिये गरचे बनाया था मुझे;
काश ख़ाक-ए-दर-ए-जानाँ न बनाया होता;
नशा-ए-इश्क़ का गर ज़र्फ़ दिया था मुझको;
उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता;
अपना दीवाना बनाया मुझे होता तूने;
क्यों ख़िरदमन्द बनाया न बनाया होता;
शोला-ए-हुस्न चमन में न दिखाया उसने;
वरना बुलबुल को भी परवाना बनाया होता।
कितनी अजीब बात है ना जब तू मेरे पास थी तो,
हर दम ये सोचता था की क्या में तेरी कदर नहीं करता
और आज तू मेरे पास नहीं है तो है तो ये एहसास होता है की,
कदर तो हमेशा से थी मगर तुजे न खोने के यकीन ने अँधा कर दिया था.
कितना सोचा था मैंने नए रिश्ते बना के भूल जाउंगी तुम्हे :point_right: लेकिन में ये भूल गई थी रिश्ते बदल सकते है, साँसे नहीं, जो की तुम हो :kissing_heart:
ए रात सोने दे...
ए रात सोने दे यूं तंग ना किया कर;
बेकार सवालों में पाबंद ना किया कर;
इस के सिवा और भी ज़माने के काम हैं;
तु मेरे ख्यालात बे-ढंग ना किया कर;
दुनियाँ में और लोग भी बस्ते हैं तन्हा;
तु सिर्फ मेरे साथ ही जंग न किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग ना किया कर;
मज़बूत हूँ, पर इतना भी नहीं हूँ;
दुनिया के सभी ग़म मेरे संग ना किया कर;
ए रात सोने दे यूँ तंग न किया कर।
एक मुद्दत से मेरे हाल से बेगाना है;
जाने ज़ालिम ने किस बात का बुरा माना है;
मैं जो जिंदगी हूँ तो वो भी हैं
अना का कैदी;
मेरे कहने पर कहाँ उसने चले आना है।
मेरी गली से वो जब भी गुज़रता होगा;
मोड़ पे जा के कुछ देर ठहरता होगा;
भूल जाना मुझको इतना आसान तो न होगा;
दिल में कुछ तो टूट के उसके भी बिखरता होगा।