इस दिल को अगर तेरा एहसास नहीं होता;
तो दूर भी रह कर के यूँ पास नहीं होता;
इस दिल ने तेरी चाहत कुछ ऐसे बसा ली है;
एक लम्हा भी तुझ बिन कुछ खास नहीं होता।
प्यास वो दिल की...
प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं;
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
बेरुख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी;
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं;
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने;
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं;
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने;
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं;
तुम तो शायर हो क़तील और वो इक आम सा शख़्स;
उस ने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं।
दर्द जब हद से गुजर जाता हूँ तो रो लेता हूँ;
जब किसी से कुछ कह
नहीं पता तो रो लेता हूँ;
यूँ तो मेला हैं चारों तरफ हमारे, लोगों का मगर;
जब कोई अपना नजर नहीं आता तो रो लेता हूँ।
कितना सोचा था मैंने नए रिश्ते बना के भूल जाउंगी तुम्हे :point_right: लेकिन में ये भूल गई थी रिश्ते बदल सकते है, साँसे नहीं, जो की तुम हो :kissing_heart: