क्यूँ तबीअत कहीं...
क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं;
दोस्ती तो उदास करती नहीं;
हम हमेशा के सैर-चश्म सही;
तुझ को देखें तो आँख भरती नहीं;
शब-ए-हिज्राँ भी रोज़-ए-बद की तरह;
कट तो जाती है पर गुज़रती नहीं;
ये मोहब्बत है, सुन, ज़माने, सुन;
इतनी आसानियों से मरती नहीं;
जिस तरह तुम गुजारते हो फ़राज़;
जिंदगी उस तरह गुज़रती नहीं।
जर्जर हौसला मरम्मत मांगता है;
मुश्किल वक्त हिम्मत मांगता है;
उम्र भर नेकी न
की गयी मगर;
अब बुढ़ापे में जन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
वफ़ा के सौदे में वो सितमगर मुझसे;
शर्त में बेशर्त मोहब्बत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
काफ़िर बेटों का वो खुदा-परस्त बाप;
औलादों के लिए मन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
एक रुपया नहीं निकलता उनकी जेब
से;
जिनके लिए माँ का दिल बरकत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
Zindagi ye rang dikhati hai kitne,
Gair ho jate hain, ek pal mein apne.
Sapno ki duniya mein kabhi na jana yaar,
Dil toot jata hai, jab toot te hain sapne
Jaroori Nahi Jise Ham Chaahte
He Wo Hamara Ho Jaroori Nahi
Hai Jeene Ke Liye Koi Sahaara
Ho Kuch Kashtiyan Khud Wa
Khuddoob Jaatin Hen Jaroori Nahi
Har Kashti Ka Koi Kinaara Ho.
bindass chhotan chandra
कही ईसा, कहीं मौला,
कहीं भगवान रहते है;
हमारे हाल से शायद सभी अंजान रहते हैं;
चले आये, तबीयत आज
भारी सी लगी अपन
सुना था आपकी बस्ती में कुछ इंसान
रहते है।
मेरी दोस्त बड़ी वो प्यारी है, फूलो की जैसी निर्मल है,
सूरज की जैसी किरने है, बाते भी उस की निर्मल है,
पूजा की जैसी थाली है, चेहरे पर उस के लाली है,
दोस्ती उस की सच्ची है, वो दिल की बोहुत अच्छी है….
हम तो मौजूद थे रात में उजालों की तरह;
लोग निकले ही नहीं ढूंढने वालों की तरह;
दिल तो क्या हम रूह में भी उतर जाते;
उस ने चाहा ही नहीं चाहने वालों की तरह।