ना पूछो हाल मुझसे #धड़कनो की #रफ़्तार का
असर आज भी है आँखों में मेरे #दीदार का
लिख दिया है अपना #अफसाना लफ्ज़ो में तुझको
सुन लो मेरी #आवाज में एक #नगमा #प्यार का ..iii
बिकता अगर प्यार तो कौन
नहीं खरीदता;
बिकती अगर खुशियां तो कौन उसे बेचता;
दर्द अगर बिकता तो हम आपसे खरीद लेते;
और आपकी खुशियों के लिए हम खुद को बेच
देते।
प्यास वो दिल की...
प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं;
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
बेरुख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी;
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं;
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने;
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं;
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने;
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं;
तुम तो शायर हो क़तील और वो इक आम सा शख़्स;
उस ने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं।
यूनानी मिश्र और रोमी सब मिट गये जहाँ से;
अब तक मगर हैं बाकी नाम-ओ-निशा हमारा;
कुछ बात हैं के हसती मिटती नहीं हमारी;
सदियों रहा हैं दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा।
हम उबलते हैं तो भूचाल उबल जाते हैं;
हम मचलते हैं तो तूफ़ान मचल जाते हैं;
हमें बदलने की कोशिश करनी है ऐ दोस्तों;
क्योंकि हम बदलते हैं तो इतिहास बदल जाते है।
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार...
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है;
न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है;
किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म;
गिला है जो भी किसी से तेरे सबब से है;
हुआ है जब से दिल-ए-नासुबूर बेक़ाबू;
कलाम तुझसे नज़र को बड़े अदब से है;
अगर शरर है तो भड़के, जो फूल है तो खिले;
तरह तरह की तलब तेरे रंगे-लब से है;
कहाँ गये शबे-फ़ुरक़त के जागनेवाले;
सितारा-ए-सहरी हमकलाम कब से है।
कही ईसा, कहीं मौला,
कहीं भगवान रहते है;
हमारे हाल से शायद सभी अंजान रहते हैं;
चले आये, तबीयत आज
भारी सी लगी अपन
सुना था आपकी बस्ती में कुछ इंसान
रहते है।
Tumhari pasand hamari chahat ban jaaye,
Tumhari muskrahat dil ki rahat ban jaaye,
Khuda khushiyo se itna khush kar de apko
Ki aapko khush dekhna hmari adat ban jaaye.
जर्जर हौसला मरम्मत मांगता है;
मुश्किल वक्त हिम्मत मांगता है;
उम्र भर नेकी न
की गयी मगर;
अब बुढ़ापे में जन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
वफ़ा के सौदे में वो सितमगर मुझसे;
शर्त में बेशर्त मोहब्बत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
काफ़िर बेटों का वो खुदा-परस्त बाप;
औलादों के लिए मन्नत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
एक रुपया नहीं निकलता उनकी जेब
से;
जिनके लिए माँ का दिल बरकत मांगता है;
मुश्किल वक्त...
जो गुमां करे इस नक्श पे, वो अक्स भी एक खाक है
जिस सादगी में नूर हो, वो हुस्न ही मेहताब है
जिस नजर में खुमार हो,जो जिगर से जांनिसार हो
जिसे जलके ही करार हो, वो इश्क ही आफताब है
Swee2