कभी नजरे मिलाने में...
कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है;
कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है;
किसी ने आँखे भी ना खोली तो सोने की नगरी में;
किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है;
कभी काली सियाह राते हमें एक पल की लगती है;
कभी एक पल बिताने में ज़माने बीत जाते है;
कभी खोला दरवाजा सामने खड़ी थी मंजिल;
कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है;
एक पल में टूट जाते है, उम्र भर के वो रिश्ते;
जिन्हें बनाने में जमाने बीत जाते है।
आँखों के इंतज़ार को दे कर हुनर चला गया;
चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया;
दिन की वो महफिलें गईं, रातों के रतजगे गए;
कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया;
झोंका है एक बहार का रंग-ए-ख़याल यार भी;
हर-सू बिखर-बिखर गई ख़ुशबू जिधर चला गया;
उसके ही दम से दिल में आज धूप
भी चाँदनी भी है;
देके वो अपनी याद के शम्स-ओ-क़मर चला गया;
कूचा-ब-कूचा दर-ब-दर कब से भटक रहा है दिल;
हमको भुला के राह वो अपनी डगर चला गया।
Jaroori Nahi Jise Ham Chaahte
He Wo Hamara Ho Jaroori Nahi
Hai Jeene Ke Liye Koi Sahaara
Ho Kuch Kashtiyan Khud Wa
Khuddoob Jaatin Hen Jaroori Nahi
Har Kashti Ka Koi Kinaara Ho.
bindass chhotan chandra
दिल तो तोड ही दिया आपने,
अब चिता भी जला देना ,
कफ़न ना मिले तो ,
ये दुपट्टा ही ओढ़ा देना ,
कोई पुछे कि बिमारी क्या थी हमें ,
तो नजरे झुका के मोहब्बत बता देन.
एक अजीब सी हरकत हो गयी है तेरे जाने के बाद, हमें भुख ही नहीं लगती खाना खाने के बाद, मेरे पास 8 समोसे थे जो मैने खा लिए, 1 तेरे आने से पहले 7 तेरे जाने के बाद, नींद ही नहीं आती मुझे सोने के बाद, नजर कुछ नहीं आता आँखें बंद होने के बाद, डाक्टर से पुछा इसका इलाज, देकर 4 टैबलेट बोला, खा लेना 2 जागने से पहले 2 सोने के बाद
Jab koyi itna khaas ban jaaye,
Uske bare me hi sochna ehsaas ban jaye
To mang lena khuda se use zindagi k liye,
Isse pahle k wo kisi aur ki saans ban jaaye.
जब हो तुझे मेरी जरुरत
मैं हाज़िर हो जाऊ
जीवन में हो जब बुरा वक़्त
मैं साथ निभाऊ
ख़ुशी मिले तुम्हे जब इस जहाँ में
मैं पीछे खड़ा हो मुस्कुराऊ
जीवन में हर वक़्त तेरी परछाई बन
मैं तेरे साथ चलता जाऊ.
बदला न अपने आपको...
बदला न अपने आपको जो थे वही रहे;
मिलते रहे सभी से अजनबी रहे;
अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी;
हम जिसके भी क़रीब रहे दूर ही रहे;
दुनिया न जीत पाओ तो हारो न खुद को तुम;
थोड़ी बहुत तो जे़हन में नाराज़गी रहे;
गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो;
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे;
हर वक़्त हर मकाम पे हँसना मुहाल है;
रोने के वास्ते भी कोई बेकली रहे।
तेरी महोब्बत के प्यासे थे
इसलिए हाथ फैला दिए ऐ सनम
वरना हम तो खुद की जिन्दगी के लिए दुआ भी नहीं करते.
कभी-कभी ऐसा भी होता है!
प्यार का असर जरा देर से होता है!
आपको लगता है हम कुछ नहीं सोचते आपके बारे में!
पर हमारी हर बात में आपका ही जिक्र होता है