यूँ तो घुट जाएगा दम कुछ हवा तो आने दो
तोड़ दे जो ख़ामोशी वो सदा तो आने दो
छोड़ देंगें साथ सब जिनकों समझा हमसफ़र
पेश राहों में कोई वाकि़आ तो आने दो
कुछ जुदा तुमसे रहे, कुछ क़दम तन्हा चलें
दरमियां अपने ज़रा फ़ासिला तो आने दो
ढूँढ लेंगें कितने ही रास्ते और मंज़िलें
इस बियाबां में नज़र नक़्शे-पा तो आने दो
हम अकेले ही सही मगर चलते रहे
ये न कहते थे कोई क़ाफ़िला तो आने दो......
दोनों जहाँ देके वो...
दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा;
यां आ पड़ी ये शर्म की तकरार क्या करें;
थक-थक के हर मक़ाम पे दो चार रह गये;
तेरा पता न पायें तो नाचार क्या करें;
क्या शमा के नहीं है हवाख़्वाह अहल-ए-बज़्म;
हो ग़म ही जांगुदाज़ तो ग़मख़्वार क्या करें।
Translation:
नाचार=जिनका बस ना चले,
हवाख़्वाह=शुभचिंतक,
अहल-ए-बज़्म=महफिल वाले,
जांगुदा=जान घुलाने वाला।
तेरे बगैर इस ज़िन्दगी की हमें जरुरत नहीं;
तेरे सिवा हमें किसी और की चाहत नहीं;
तुम ही रहोगे हमेशा मेरे दिल में;
किसी और को इस दिल में आने की इजाज़त नहीं।
गुलसन है अगर सफ़र
जिंदगी का,
तो इसकी मंजिल समशान
क्यों है ?
जब जुदाई है प्यार का मतलब, तो फिर प्यार
वाला हैरान क्यों है ?
अगर जीना ही है
मरने के लिए, तो जिंदगी ये वरदान
क्यों है ?
जो कभी न मिले उससे
ही लग जाता है दिल,
आखिर ये दिल इतना नादान क्यों है
समंदर पीड का अंदर है लेकिनरो नहीं सकता,
ये आँसु प्यार का मोती हैइसको खो नहीं सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तु बनालेना मगर सुन ले...
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा.
जब हो तुझे मेरी जरुरत
मैं हाज़िर हो जाऊ
जीवन में हो जब बुरा वक़्त
मैं साथ निभाऊ
ख़ुशी मिले तुम्हे जब इस जहाँ में
मैं पीछे खड़ा हो मुस्कुराऊ
जीवन में हर वक़्त तेरी परछाई बन
मैं तेरे साथ चलता जाऊ.
ना पूछो हाल मुझसे #धड़कनो की #रफ़्तार का
असर आज भी है आँखों में मेरे #दीदार का
लिख दिया है अपना #अफसाना लफ्ज़ो में तुझको
सुन लो मेरी #आवाज में एक #नगमा #प्यार का ..iii