यूनानी मिश्र और रोमी सब मिट गये जहाँ से;
अब तक मगर हैं बाकी नाम-ओ-निशा हमारा;
कुछ बात हैं के हसती मिटती नहीं हमारी;
सदियों रहा हैं दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा।
उलझी हुई दुनीयां को पाने
की जिद्द करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की जिद्द करो,
इस समंदर में तुफान बहुत आते है तो क्या हुआ,
इसके साहिल पे घर बनाने की जिद्द करो...
khan
Jaroori Nahi Jise Ham Chaahte
He Wo Hamara Ho Jaroori Nahi
Hai Jeene Ke Liye Koi Sahaara
Ho Kuch Kashtiyan Khud Wa
Khuddoob Jaatin Hen Jaroori Nahi
Har Kashti Ka Koi Kinaara Ho.
bindass chhotan chandra
सुबह रो-रो के...
सुबह रो-रो के शाम होती है;...
शब तड़प कर तमाम होती है;
सामने चश्म-ए-मस्त साक़ी के;
किस को परवाह-ए-जाम होती है;
कोई ग़ुंचा खिला के बुल-बुल को;
बेकली ज़र-ए-दाम होती है;
हम जो कहते हैं कुछ इशारों से;
ये ख़ता ला-कलाम होती है।
ओंस की बूँद सी...
ओंस की बूँद सी होती है बेटियाँ;
स्पर्श खुरदरा हो तो रोती हैं बेटियाँ;
रोशन करेगा बेटा तो एक कुल को;
दो दो कुलो की लाज होती हैं बेटियाँ;
कोई नहीं है एक दूसरे से कम;
हीरा अगर है बेटा;
तो सुच्चा मोती है बेटियाँ;
काँटों की राह पर यह खुद ही चलती हैं;
औरों के लिए फूल होती हैं बेटियाँ;
विधि का विधान है;
यही दुनियाँ की रस्म है;
मुट्ठी भर नीर सी होती हैं बेटियाँ।