हो गई है पीर पर्वत-सी...
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए;
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए;
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी;
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए;
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में;
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए;
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं;
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए;
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही;
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
दिल मेरा जिस से...
दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला;
बुत के बन्दे तो मिले अल्लाह का बन्दा न मिला;
बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस;
एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा न मिला;
गुल के ख़्वाहाँ तो नज़र आये बहुत इत्रफ़रोश;
तालिब-ए-ज़मज़म-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला;
वाह क्या राह दिखाई हमें मुर्शद ने;
कर दिया काबे को गुम और कलीसा न मिला;
सय्यद उट्ठे जो गज़ट ले के तो लाखों लाये;
शैख़ क़ुरान दिखाता फिरा पैसा न मिला।
हर तरफ हर जगह...
हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी;
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी;
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ;
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी;
रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ;
हर नए दिन नया इतज़ार आदमी;
हर तरफ भागते दौड़ते का शिकार आदमी;
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी;
ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र;
आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी।
Jab koyi itna khaas ban jaaye,
Uske bare me hi sochna ehsaas ban jaye
To mang lena khuda se use zindagi k liye,
Isse pahle k wo kisi aur ki saans ban jaaye.
जब से देखा ह तेरी आखो:eyes: मे झाक कर आईना:mag: अच्छा नही :smirk:लगता मोहब्बत:two_hearts: मे ऐसे हुए ह दीवाने तुम्हें कोई देखे:sunglasses:,तो अच्छा नहीं :smirk:लगता
इस कदर इस जहाँ में जिंदा हूँ मैं
हो गयी थी भूल अब शर्मिंदा हूँ मैं
मेरी कोशिश है की ना हो तेरी दुनिया में कोई गम
तू आवाज़ दे गगन से एक परिंदा हूँ मैं ...