हवा बन कर...
हवा बन कर बिखरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
मेरे जीने या मरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उसे तो अपनी खुशियों से;
ज़रा भी फुर्सत नहीं मिलती;
मेरे ग़म के उभरने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है;
उस शख्स की यादों में;
मैं चाहे रोते रहूँ लेकिन;
मेरे ऐसा करने से;
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है।
Mujhe Dekh Muskuraya Na Karo, Raaton Ko Khawab Main Aakar Jagaya Na Karo, Mohabbat Hai Yaa Hai Nafrat Humse Saaf Saaf Kehdo, Yuh Khamosh Reh Kar Dil Humara Jalaya Na Karo.
सुबह रो-रो के...
सुबह रो-रो के शाम होती है;...
शब तड़प कर तमाम होती है;
सामने चश्म-ए-मस्त साक़ी के;
किस को परवाह-ए-जाम होती है;
कोई ग़ुंचा खिला के बुल-बुल को;
बेकली ज़र-ए-दाम होती है;
हम जो कहते हैं कुछ इशारों से;
ये ख़ता ला-कलाम होती है।
इस दिल को अगर तेरा एहसास नहीं होता;
तो दूर भी रह कर के यूँ पास नहीं होता;
इस दिल ने तेरी चाहत कुछ ऐसे बसा ली है;
एक लम्हा भी तुझ बिन कुछ खास नहीं होता।
नया दर्द एक और दिल में जगा कर चला गया;
कल फिर वो मेरे शहर में आकर चला गया;
जिसे ढूंढ़ता रहा मैं लोगों की भीड़ में;
मुझसे वो अपने आप को छुपा कर चला गया।
कुछ खूबसूरत से पल किस्सा बन जाते है;
जाने कब जिंदगी का हिस्सा बन जाता है;
कुछ लोग अपने होकर भी अपने
नहीं होते;
और कुछ बेगाने होकर
भी जिंदगी का हिस्सा बन जाते है।
चुप भी रहो सनम , लब से न इश्क की कुछ बात करो
अंखियों में अंखिया डाल, नैनो से प्यार का इज़हार करो
हमको तो तुम्हारी खुबसूरत अदाओं ने ही मार डाला है
अभी तो मोहब्बत की शुरुवात है कुछ तो इंतज़ार करो