क्यूँ तबीअत कहीं...
क्यूँ तबीअत कहीं ठहरती नहीं;
दोस्ती तो उदास करती नहीं;
हम हमेशा के सैर-चश्म सही;
तुझ को देखें तो आँख भरती नहीं;
शब-ए-हिज्राँ भी रोज़-ए-बद की तरह;
कट तो जाती है पर गुज़रती नहीं;
ये मोहब्बत है, सुन, ज़माने, सुन;
इतनी आसानियों से मरती नहीं;
जिस तरह तुम गुजारते हो फ़राज़;
जिंदगी उस तरह गुज़रती नहीं।
प्रेम
तन्हाईयों में मुस्कुराना इश्क है;
एक बात को सबसे छुपाना इश्क है;
यु तो नींद नहीं आती हमें रात भर;
मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागतेसोना इश्क है!
Tumhari pasand hamari chahat ban jaaye,
Tumhari muskrahat dil ki rahat ban jaaye,
Khuda khushiyo se itna khush kar de apko
Ki aapko khush dekhna hmari adat ban jaaye.
जब तुम्हारा जादू चलेगा
सब तरफ होगी बहार
हर कोई होगा बेक़रार
तुम्हारा इंतज़ार ……………
ना कहीं होगा वैर
ना कहीं होगी घृणा
बस प्यार ही प्यार
तुम्हारा इंतज़ार ……………
हम रोज़ प्रेम दिवस मनाएँग
Mujhe Dekh Muskuraya Na Karo, Raaton Ko Khawab Main Aakar Jagaya Na Karo, Mohabbat Hai Yaa Hai Nafrat Humse Saaf Saaf Kehdo, Yuh Khamosh Reh Kar Dil Humara Jalaya Na Karo.
प्यास वो दिल की...
प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं;
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं;
बेरुख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी;
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं;
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने;
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं;
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने;
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं;
तुम तो शायर हो क़तील और वो इक आम सा शख़्स;
उस ने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं।