हवा का ज़ोर
भी काफ़ी बहाना होता है;
अगर चिराग किसी को जलाना होता है;
ज़ुबानी दाग़ बहुत लोग करते रहते हैं;
जुनूँ के काम को कर के दिखाना होता है;
हमारे शहर में ये कौन अजनबी आया;
कि रोज़ सफ़र पे रवाना होता है;
कि तू भी याद नहीं आता ये
तो होना था;
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है।
Jab koyi itna khaas ban jaaye,
Uske bare me hi sochna ehsaas ban jaye
To mang lena khuda se use zindagi k liye,
Isse pahle k wo kisi aur ki saans ban jaaye.
किसी के दिल पे क्या गुजरी हे वो अनजान क्या जाने,
प्यार किसको कहते हे वो नादान क्या जाने,
हवा के साथ उठा ले गया घर का परिंदा,
केसे बना था ये घोसला वो तूफान क्या जाने.
यार था गुलज़ार था...
यार था गुलज़ार था बाद-ए-सबा थी मैं न था;
लायक़-ए-पा-बोस-ए-जाँ क्या हिना थी, मैं न था;
हाथ क्यों बाँधे मेरे छल्ला अगर चोरी हुआ;
ये सरापा शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना थी, मैं न था;
मैंने पूछा क्या हुआ वो आप का हुस्न्-ओ-शबाब;
हँस के बोला वो सनम शान-ए-ख़ुदा थी, मैं न था;
मैं सिसकता रह गया और मर गये फ़रहाद-ओ-क़ैस;
क्या उन्हीं दोनों के हिस्से में क़ज़ा थी, मैं न था।
चुप भी रहो सनम , लब से न इश्क की कुछ बात करो
अंखियों में अंखिया डाल, नैनो से प्यार का इज़हार करो
हमको तो तुम्हारी खुबसूरत अदाओं ने ही मार डाला है
अभी तो मोहब्बत की शुरुवात है कुछ तो इंतज़ार करो