क्या फ़र्क है दोस्ती और मोहब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही हैं लेकिन फ़र्क तो है;
बरसों बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहब्बत नज़र चुरा लेती है।
दोनों जहाँ देके वो...
दोनों जहाँ देके वो समझे ये ख़ुश रहा;
यां आ पड़ी ये शर्म की तकरार क्या करें;
थक-थक के हर मक़ाम पे दो चार रह गये;
तेरा पता न पायें तो नाचार क्या करें;
क्या शमा के नहीं है हवाख़्वाह अहल-ए-बज़्म;
हो ग़म ही जांगुदाज़ तो ग़मख़्वार क्या करें।
Translation:
नाचार=जिनका बस ना चले,
हवाख़्वाह=शुभचिंतक,
अहल-ए-बज़्म=महफिल वाले,
जांगुदा=जान घुलाने वाला।
तन्हा हो कभी तो मुझे ढूंढ लेना;
इस दुनियां से नहीं अपने दिल से पूछ लेना;
आपके आस पास ही कहीं रहते हैं हम;
यादों से नहीं तो साथ गुज़ारे लम्हों से पूछ लेना।
Me नहीं जानता Kエ :heart_eyes: क्या Googlε हैं, क्या Facεbook हैं, Mε :kissing_heart: तो बस エtna जानता हूँ :sparkling_heart: Tuღ मेरे Wんatsapp हो, और Mε तुम्हारा Status हूँ.